प्यासा कौआ
Aesop | Greece
प्यासा कौवा कंकड़ डालकर मटके में पानी का स्तर बढ़ाता है और अपनी प्यास बुझाने में सफल होता है।

एक चींटी पानी में गिर जाती है, कबूतर उसे बचाता है, बाद में चींटी शिकारी से कबूतर को बचाती है।

एक भेड़िया कुत्ते के साथ आरामदायक जीवन पर विचार करता है, लेकिन बंधन के बजाय स्वतंत्रता को चुनता है।

एक चालाक बंदर ने मगरमच्छ को चतुराई से हराया, जिसने दोस्ती तोड़कर अपनी पत्नी को खुश करने की सोची।

एक छोटे कुएं में रहने वाला मेंढक एक समुद्री कछुए से मिलता है और बाहर की विशाल दुनिया के बारे में जानता है।

धीमा लेकिन लगातार चलने वाला कछुआ, अहंकारी और घमंडी खरगोश को दौड़ में हरा देता है।

एक गरीब किसान एक मुर्गी मिलती है जो सोने के अंडे देती है, लेकिन लालच के कारण वह उसे मार देता है और अपनी दौलत खो देता है।

चालाक लोमड़ी ने सपाट थाली में सारस को सूप परोसा, लेकिन सारस ने सुराही में खाना देकर बदला अपना बदला लेता है।

उत्तर वायु और सूर्य एक यात्री की चादर उतारने की प्रतियोगिता करते हैं, लेकिन सूर्य गर्मी से जीत जाता है।
एक सूखे इलाके में एक कौवा बहुत प्यासा था और पानी की खोज कर रहा था। वह इधर-उधर उड़ता रहा और अंततः उसे एक मटका दिखा जिसमें हल्का सा पानी था, जो मटके की तली में था।
कौवे ने पानी पिने के लिए अपनी चोंच मटके में डाली। लेकिन मटका बहुत गहरा और संकरा था, जिससे कौवा पानी तक नहीं पहुँच सका। उसने कई बार प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाया।
कौवे ने मटके को पलटने का विचार किया ताकि पानी बाहर आ जाए, पर मटका रेत में फंसा हुआ था, इसलिए यह संभव नहीं था।
पानी पीने की इच्छा अब भी थी, इसलिए कौवे ने एक उपाय लगाया। उसने मटके के पास कुछ छोटे-छोटे कंकड़ देखे। कौवे ने अपनी चोंच से एक कंकड़ उठाया और मटके में डाल दिया।
हर कंकड़ से पानी थोड़ा-थोडा ऊपर उठने लगा। कौवा कंकड़ डालता रहा और धीरे-धीरे पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि वह उसे पी पाया।
अंततः कौवा पानी पीने में सफल हुआ। उसे अपनी चतुराई पर अत्यंत प्रसन्नता और गर्व का आभास हुआ।

चींटी और टिड्डा
चींटी मेहनत कर सर्दियों के लिए खाना जमा करती है, जबकि टिड्डा खेलता रहता है और भूखा रह जाता है।

किसान और साँप
एक किसान ठंड से मरते हुए साँप की मदद करता है, लेकिन साँप उसकी दया का बदला डंसकर देता है।

मिल्कमेड और उसकी बाल्टी
एक दूधवाली भविष्य के सपने देखती है, लेकिन दूध गिराने से उसकी सारी उम्मीदें बिखर जाती हैं।

लोमड़ी और लकड़हारा
एक लकड़हारे ने लोमड़ी को बचाता है, लेकिन उसका ठिकाना बताने से कृतघ्न लोमड़ी बिना धन्यवाद कहे चली जाती है।

एक शेर ने एक चूहे की जान बख्श दी, बाद में वही चूहा शेर को जाल से बचाता है।

शहर का चूहा गाँव जाता है, फिर गाँव का चूहा शहर जाता है, लेकिन खतरे से डरकर वह वापस शांतिपूर्ण गाँव लौट आता है।

एक गड़रिया लड़का बार-बार भेड़िया कहकर गाँववालों को छलता है, लेकिन असली भेड़िया आने पर कोई उसकी बात नहीं मानता।

एक ब्राह्मण फंसे हुए बाघ को बचाता है, जो अपना वादा तोड़ता है, लेकिन चालाक सियार की मदद से मात खाता है।

चालाक लोमड़ी ने चापलूसी से अभिमानी कौए को उसकी चीज़ गिराने पर मजबूर कर तुरंत उसे चुरा लेती है।

चींटी मेहनत कर सर्दियों के लिए खाना जमा करती है, जबकि टिड्डा खेलता रहता है और भूखा रह जाता है।

एक किसान ठंड से मरते हुए साँप की मदद करता है, लेकिन साँप उसकी दया का बदला डंसकर देता है।

एक दूधवाली भविष्य के सपने देखती है, लेकिन दूध गिराने से उसकी सारी उम्मीदें बिखर जाती हैं।
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